हनुमान जयंती पर भाषण व निबंध 2022 - Hanuman Jayanti Speech & Essay in Hindi

Hanuman Jayanti Speech, Essay in Hindi: नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका आज की इस भाषण व निबंध की मजेदार जानकारी में, दोस्तों आज हम आपके लिए "हनुमान जयंती पर भाषण व निबंध" दोनों लेकर आए है और आज हम आपको इस पृष्ठ पर "हनुमानजी जयंती पर भाषण व निबंध" के बारे में बता रहे है.

जैसा कि आप जानते ही होंगे कि Hanuman Jayanti भी भारत का एक प्रसिद्ध त्योहार है जो खासकर हनुमानजी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है. कहा जाता है कि इस दिन भगवान श्री रामचंद्र के परम भक्त वीर हनुमानजी का जन्म हुआ था इसलिए हर साल हनुमानजी के भक्तगण उनके जन्मदिन को मनाने के लिए इसे हनुमान जयंती के रूप में मनाते है.

हनुमान जयंती पर भाषण व निबंध 2022 - Hanuman Jayanti Speech & Essay in Hindi
Hanuman Jayanti Speech & Essay in Hindi


हनुमान जयंती पर निबंध 2022 - Essay on Hanuman Jayanti in Hindi

प्रस्तावना - हनुमान जयंती एक भारत का प्रमुख और महत्वपूर्ण त्योहार है जो हर साल चैत्र माह की पूर्णिमा को पूरे देश में बड़े ही हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है. हनुमान जयंती मुख्य रूप से हनुमान जी के जन्मदिन को मनाने के लिए मनाई जाती है. क्योंकि हनुमान जी कलयुग में सबसे शक्तिशाली देवताओं में से एक गिने जाता है. जिन्होंने माता सीता को दुष्ट रावण से बचाने के लिए पूरी लंका नगरी को एक झटके में जलाकर राख कर दिया था.

हनुमान जयंती पर लोग हनुमानजी के मंदिर में उनका दर्शन करने जाते है तथा सड़कों और गलियों में सभी एक मिलकर जुलूस निकालते है. हनुमान जयंती के दौरान भारत के कई जगहों पर हनुमान मंदिरों में हनुमान जी के भक्तगणों द्वारा विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है जिसमें बड़े ही हर्ष के साथ लोग इन कार्यक्रमों में भाग लेकर हनुमान जी के गुणगान करते है और दिनभर उनके मंदिर में आते-जाते रहते है.

हनुमान जयंती का इतिहास - हनुमान जयंती खासकर इसलिए मनाया जाता है क्योंकि इस दिन भगवान हनुमानजी का जन्म हुआ था जो आज से करीब 58 हजार 112 वर्ष पहले की बात है. कहा जाता है कि हनुमानजी का जन्म चैत्र माह की पूर्णिमा को मंगलवार के दिन, मेष लग्न व चित्रा नक्षत्र के योग में झारखंड के गुमला जिले के आंजन नाम की एक गुफा में हुआ था. लेकिन अभी भी वास्तविक रूप से यह बात साबित नहीं हो पायी है कि हनुमान जी झारखंड में ही जन्मे थे.

क्योंकि हनुमान जी के जन्म को लेकर कई ज्योतिषयों की अलग-अलग राय, धारणाएँ और प्रतिबद्धता रही है. जैसे कि कर्नाटक के रहने वाले ज्योतिषयों का कहना है कि हनुमान जी का जन्म कर्नाटक में हुआ था वही दूसरे क्षेत्रों में मध्यप्रदेश में रहने वाले आदिवासी लोगो का कहना है की हनुमान जी मध्यप्रदेश में पैदा हुए थे तथा फादर कामिल बुल्के ने अपने तथ्यों में लिखा है कि हनुमान जी वानर पंथ में जन्मे हुए शक्तिशाली वानर थे इस तरह हनुमान जी के जन्म को लेकर हर क्षेत्र में अलग-अलग मान्यताएँ छिपी हुई है.

हमारे हिन्दू धर्म में हनुमान जी को शिवजी का अवतार माना जाता है. कहते है कि जब भगवान विष्णु ने रावण का वध करने हेतु श्री राम के रूप में अवतार लिया था तब उनका साथ देने के लिए लिए स्वयं शिवजी हनुमान के अवतार में आए थे. जब रावण ने अपने मोक्ष की प्राप्ति के लिए शिवजी से वरदान मांगा था तब शिवजी जी हनुमान के रूप में अवतरित हुए थे तथा हनुमान ने रावण को सदा-सदा के लिए अमर कर उन्हें भगवान श्री राम के हाथों मोक्ष भी दिलवाया था जो रामायण के परिपूर्ण वर्णन में यह ऐतिहासिक पन्नों में जुड़ा हुआ है.

हनुमान जी के बारे में - हनुमान एक पराक्रमी और शक्तिशाली देवता थे जिनका जन्म आज से ठीक 58112 पहले का माना जाता है. हनुमान जी भगवान श्री राम के सच्चे और श्रद्धावान भक्त थे. उन्होंने अपना पूरा जीवन भगवान राम की भक्ती में ही समर्पित कर दिया था तथा उन्होंने हमेशा "जय श्री राम" जैसे ही शब्दों उच्चारण किया था. रामायण के अनुसार हनुमान जी ने समुद्र पार करके सीता माता को भगवान राम का दिया था. लंका में उन्हें रावण के सैनिकों द्वारा बंदी बना लिया जाता है और उन्हें लज्जीत कर उनकी पूँछ जलाने का प्रयास किया जाता है जिससे क्रोधित होकर उन्होंने पूरी लंका नगरी ही जला दी थी.

इसी से हमें यह अनुभूति होती है कि हनुमान जी वास्तव में बलशाली, ताकतवर और प्रतिष्ठावान देवता थे जिन्हें शिवजी का ग्यारहवाँ रूद्रावतार माना जाता है. लोगों द्वारा अक्षर कहा जाता है हनुमानजी का जन्म भगवान राम की मदद करने के लिए हुआ था. हनुमान जी की शक्तियों के आगे दुष्ट भूरी शक्तियाँ मात्र, नाम मात्र से ही दूर भाग जाती है. हनुमान जी बचपन में ही बहुत शरारती और नटखट थे. बचपन में उनका नाम बजरंगबली था. हनुमानजी वानरों के राजा सुग्रीव के परम मित्र और प्रतिष्ठित दूत थे इसी दौरान वो भगवान राम को वानर के रूप में मिले थे हनुमान जी को जैसे मारुति, बजरंग बली, अंजनि सुत, संकटमोचन, पवनपुत्र, केसरीनन्दन, कपीश, महावीर, शंकर सुवन आदि अन्य नामों से जाना जाता है.

हनुमान जयंती कब और कैसे मनाई जाती है - हमारा देश एक त्योहारों वाला देश यहाँ हर साल विभिन्न प्रकार के त्योहार आते है और हमारे देशवासियों को हर्षित और उत्साहित करते रहते है उन्ही में हनुमान जयंती भी हमारे भारत का प्रमुख और महत्वपूर्ण जो लोगों का संकट व बाँधाएँ दूर कर हमें खुशियों का आनंद देता है. हनुमान जयंती प्रति वर्ष चैत्र माह की पूर्णिमा को मनाई जाती है. इस दिन लोग सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद हनुमान मंदिरों में इकट्ठा हो जाते है. फिर हनुमान जी के दर्शन करने जाते है और वहाँ उनकी आरती कर उनकी पूजा-अर्चना करते है.

इस दिन लोग हनुमानजी की प्रचलित कथाएँ सुनाते है तथा उन्हें याद कर अपने जीवन मे उनसे सुख समृद्धि की कामनाएँ करते है. हनुमान जी एक ऐसे भगवान है जिनके भक्तों की कोई कमी नहीं है हनुमान जयंती के दिन हनुमान मंदिरों में उनके भक्तों की अपार भीड़ रहती है. मंदिर चाहे छोटे हो या बड़े हर जगह हनुमान जी के भक्त उत्साहित होकर इस त्योहार का मजा लेते है. लोग पूरे दिन हनुमान जी के भजन, हनुमान चालीचा आदि का दोहन करते रहते है. इस दिन लोग हनुमानजी की प्रतिमा पर सिंदूर लगाकर मंदिर को चारों और से आम के पत्तों और फूलों से सजाते है.

फिर हनुमान जी को फल, प्रसाद और मिठाइयों आदि से भोग लगाते है. इस दिन पूरी रात सभी भक्तगण जात-पात को भूलकर हनुमान जी का पूजा पाठ करते है. उसके बाद हनुमान जी के चढ़ाए हुए व्यंजनों को प्रसाद के रूप सब भक्तजन आपस में बांटते है और सब बड़े ही चाव से इस प्रसाद को ग्रहण कर खाते है. इस प्रकार बड़े ही धूमधाम हर साल हनुमान जी के भक्त द्वारा पूरी श्रद्धा और आस्था से हनुमान जयंती मनाई जाती है. क्योंकि हनुमान जी खासकर संकटमोचन हरण के लिए जाने जाते है. इस दिन उनकी पूजा अर्चना करने से हमारे जीवन में मंगलमय होता है तथा भूत-प्रेत आदि से छुटकारा मिलता है.

हनुमान जयंती की रस्म और रीति रिवाज - हनुमान जयंती भी एक ऐसा त्योहार है जो देश में अन्य त्योहारों की तरह ही हमारे सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं से जुड़ा हुआ है. इसे भी देश के विभिन्न इलाकों में लोगों की अपनी पारंपरिक रस्म और रीति रिवाज अनुसार मनाया जाता है. हनुमान जी भारत व नेपाल के हिन्दूओं के प्रमुख देवता है जिन्हें आदिकाल से ही हमारे हिन्दूओं द्वारा पूजा जा रहा है. हनुमान जयंती मुख्य रूप से हनुमान जी से जुड़ने व उनके आध्यात्मिक गुणों को याद करने का त्योहार है.

दक्षिणी भारत में इस त्योहार को ज्यादातर लोग हनुमान वर्धन्ति के नाम से मनाते है. हनुमान जयंती हिन्दू कैलेंडर के अंतर्गत चैत्र महीने में पूर्णिमा को मनाई जाती है वही दूसरे कुछ लोगों का मानना है कि हनुमानजी अश्विन महीने में पहले पखवाड़े के चौदहवें दिन जन्मे थे इसलिए उन लोगों द्वारा हनुमान जयंती दिसंबर महीने में मनाई जाती है. तमिलनाडु में हनुमान जयंती उनके जन्म दिवस को नहीं मनाई जाती बल्कि उस दिन मनाई जाती है, जिस दिन भगवान राम से हनुमानजी पहली बार मिले थे.

हनुमान जयंती का उत्साह - हनुमान जयंती देश कोने-कोने में जबरदस्त तरीके से एक पर्व के रूप में मनाई जाती है. यह दिन हनुमान जी को याद करने का होता है. इस दिन विशेष रूप से हनुमान जी के भक्त व्रत, मेला, भजन-कीर्तन, सुंदरकांड पाठ आदि का आयोजन करते है. कई भक्त हनुमान जयंती के उपलक्ष्य में प्रातः हनुमान के मंदिर में जाकर हनुमानजी के दर्शन करते है तत्पश्चात सूर्योदय के समय हनुमान जन्म मनाया जाता है. इस सुअवसर पर लोग घरों में हनुमान जी की पंचोपचार अथवा षोडशोपचार पूजा करते है.

हनुमान जयंती के दिन उनके भक्त हनुमान जी को जनेऊ पहनाते है तथा हनुमानजी की मूर्तियों पर सिन्दूर और चाँदी का वर्क चढ़ाने की परम्परा भी विख्यात है. क्योंकि भगवान राम की लम्बी आयु के लिए हनुमानजी ने अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगाया था. इसलिए हर हनुमान जयंती पर उनके भक्त उन्हें सिंदूर लगाते है. जिसे धार्मिक परंपराओं के तहत 'चोला' कहा जाता है. इसके अलावा दक्षिण भारत में इस दिन मौन होकर शुद्ध मन से हनुमानजी की मूर्ति के आगे मन्त्र का जाप करना अति महत्वपूर्ण माना जाता है. इस तरह हनुमान जयंती पर लोग इसे उत्साह से मनाते है.

निष्कर्ष - हनुमान जयंती हमारे प्रमुख त्योहारों में से एक है जिसे हमारे पूर्वज प्राचीन समय से ही मनाते आ रहे हैं और आगे भी ऐसे ही खुशियों के साथ मनाते रहेंगे. इस दिन लोग अपने कामकाज से समय निकालकर हनुमान जी को याद कर उन्हें पूजते है. हनुमान जी एक ऐसे भगवान थे जिन्हें पूजने के लिए लोगों की लाइनें लगती है. हनुमान जी को हनुमान जयंती के दिन ही नहीं बल्कि किसी भी दिन उन्हें विशेष भगवान के रूप में पूजा जाता है. भगवान हनुमान जी इतने भोले हैं की अपने भक्तों की पुकार से ही उनके लिए प्रसन्न हो जाते है. हमारे देश में अगर हनुमान जी का सबसे ज्यादा जिक्र किया जाए तो वह रामायण ग्रंथ जिसमें हनुमान जी शक्ति, भक्ती और उनके आचरण का परिपूर्ण वर्णन मिलता है.


हनुमान जयंती पर भाषण 2022 - Speech on Hanuman Jayanti in Hindi

Hanuman Jayanti Speech Intro - माननीय मुख्य अतिथि एवं मेरे प्यारे मित्रों और यहाँ उपस्थित समस्त छोटे बड़े गणो को मेरा नमस्कार, मैं आप सभी का आज के इस कार्यक्रम में तहे दिल से हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन करता हूँ. सबसे पहले आप सभी को "हनुमान जयंती" की हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बहुत बहुत बधाई हो.

जैसा आप सब जानते ही होंगे की आज हम यहाँ क्यूँ और किस लिए एकत्रित हुए है. क्योंकि आज हमारे हिन्दूओं के सबसे शक्तिशाली और बलवान भगवान हनुमानजी का जन्म दिन है. जिन्हें पूजने और उनके जन्मदिन को मनाना हमारे लिए कितनी सौभाग्य की बात है. इसी के साथ मैं आगे बढ़ता हूँ और हनुमान जयंती के इस अवसर पर हनुमानजी के बारे में आपके साथ अपने कुछ शब्द प्रस्तुत करने जा रहा हूँ.

Hanuman Jayanti Main Speech - हनुमान जयंती हर वर्ष चैत्र माह की पूर्णिमा को आती है ठीक उसी प्रकार इस वर्ष भी हम हनुमान जयंती मनाने के लिए आज यहाँ इस भरी सभा में एक साथ इकट्ठा हुए है. आज हम हनुमान जयंती एक साथ मना रहे है यह हमारे बहुत ही खुशी और हर्ष की बात है. वास्तव में आज का हमारे लिए खुशियों का दिन है. हनुमान जयंती हनुमानजी के जन्म दिन को मनाने के लिए मनाई जाती है. आज वो पल हमारे सामने जिसका हमें भरपूर आनंद लेना चाहिए और हनुमानजी के प्रति अपनी श्रद्धा और आस्था व्यक्त करनी चाहिए.

आज हमें यह प्रण लेना चाहिए की हम हमेशा हनुमानजी की तरह ही सच्चाई और अच्छाई का आचरण करेंगे क्योंकि हनुमान जी हमेशा भगवान राम जी के बताए हुए मार्ग पर चले तथा उन्होंने भगवान राम जी के बताए हुए हर नियमों का भी परिपूर्ण पालन किया था. इसलिए आज से हमें भी उन्ही की तरह सही और सटीक मार्ग पर चलना होगा. शुरूआत हमें भले ही मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा लेकिन इसका परिणाम हमारे लिए फायदेमंद साबित होगा. हमें हनुमानजी की तरह ही असहाय लोगों की जितनी हो सके उतनी मदद करनी चाहिए. जिससे खुश होकर हनुमानजी भी हमें आशीर्वाद देंगे और हमारे जीवन में खुशियाँ भर देंगे.

हनुमान जयंती यूँ ही नहीं मनाई जाती है इसके पीछे भी रामायण जैसी बड़ी कथाएँ और पारंपरिक, धार्मिक प्रथाएँ जुड़ी हुई है. जिसमें हनुमानजी की शक्तियों व उनके बलशाली रूप का बड़े लेवल पर व्याख्यान किया गया है. जिसमें हमें यह ज्ञात होता है कि हनुमान वास्तव में बड़े-बड़े देवो में से प्रमुख देवता है. हमारे हिन्दू धर्म में हनुमान जी को कलयुग के सबसे शक्तिशाली देवता के रूप में दर्जा दिया गया है. आमतौर पर हम हर रोज हनुमानजी की पूजा करते रहते है. लेकिन आज का दिन उनकी पूजा व उन्हें याद करने के लिए विशेष दिन माना जाता है. क्योंकि इस दिन हनुमानजी का जन्म हुआ था इसलिए इसे मनाने में हमें खुशी तो जरूर होगी.

हनुमान जी को भगवान श्री राम का सच्चा भक्त माना जाता है क्योंकि वे हर विकट परिस्थिति में निस्वार्थ भाव से भगवान राम की सहायता के लिए तत्पर रहे. वो हमेशा उठते, जागते, बैठते हर पल राम जी नाम लेते थे. इसलिए आप समझ सकते हैं कि हनुमानजी अपने प्रभु के लिए कितनी ही कठिन परिस्थितियों से घूजरे लेकिन उनका बाल भी बाँका नहीं हुआ. आपने यह अवश्य देखा होगा कि जहां भगवान राम की मूर्ति या तस्वीर होती है वही हनुमानजी की भी मूर्ति या तस्वीर होती है इसी से हमें यह भी ज्ञात होता है कि वे दोनों एक दूसरे के पूरक उदाहरण थे. हनुमानजी को भगवान शिवजी का ग्यारहवाँ रूद्रावतार होने धावा किया जाता है.

मान्यता है कि भगवान राम का साथ देने के लिए लिए महादेव ने हनुमानजी का रूप धारण किया था. बचपन में हनुमानजी सूर्य को फल समझकर निगल गए थे तब देवराज इंद्र ने गुस्से में आकर उनकी ठोड़ी को तोड़ दिया जिससे वे मूर्छित हो गए तब उन्हें ठीक करने के लिए देवताओं ने उन्हें पुनःजिवित किया तथा उनका नाम बजरंगबली से हनुमान रखा था. इसके अलावा भी हनुमानजी को शंकर सुवन, मारुति, कपीश, महावीर, केसरीनन्दन, अंजनि सुत, संकटमोचन और पवनपुत्र जैसे नामों से जाना जाता है. हनुमानजी इतने शक्तिशाली थे कि महाविनाशकारी रावण भी उन्हें रोक नहीं पाया और इसी के साथ वो बहुत ही शांत और सौम्य स्वभाव के भी थे.

इसलिए हमें हनुमान जयंती के दिन उन्हें विशेष रूप से से याद करना चाहिए और उनसे हमे सीख भी लेनी चाहिए. जिससे हमारा जीवन खुशियों से बीते. हनुमान जयंती के दिन हमें हनुमानजी की सम्मान पूर्वक पूजा करनी चाहिए इससे हनुमानजी हमें भी शक्त प्रदान करेंगे. केरल व तमिलानाडु में हनुमान जयंती मार्गशीर्ष माह की अमावस्या को मनाई जाती है वही उड़ीसा में यह जयंती वैशाख महीने की शुरुआत में पहले दिन मनाई जाती है. इस प्रकार हनुमान जयंती पूरे भारतवर्ष में बड़े ही उल्लास और धूमधाम से मनाई जाती है. अंत में मेरी ओर से एक बार और आप सभी को हनुमान जयंती की हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बहुत बहुत बधाई, इसी के साथ मैं अपनी वाणी को विराम देता हूँ.


मुझे उम्मीद और आशा है कि आज का यह लेख "हनुमान जयंती पर भाषण व निबंध 2022 - Hanuman Jayanti Speech & Essay in Hindi आपको पसंद आया होगा. यदि आपको हमारे द्वारा लिखा गया यह लेख पसंद आए तो हम आपसे यही चाहेंगे की आप इसे अपने दोस्तों में शेयर करे ताकि कोई हनुमान जी पर भाषण व निबंध चाहता हो तो उन्हें भी यह जानकारी उपलब्ध हो सके.


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