डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन भाषण - Dr. Sarvepalli Radhakrishnan in hindi speech

Dr. Sarvepalli Radhakrishnan Speech 2022 | डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन पर भाषण हिंदी में

नमस्कार दोस्तों स्वागत आपका आज के इस भाषण में, दोस्तों आज हम हमारे देश के एक महान वीर होनहार अध्यापक 'डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी' के जीवन पर आधारित उनसे जुड़े हुए कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों पर भाषन करने वाले है जो हम नीचे दी गई जानकारी में विस्तारपूर्वक समझेगे और जानेंगे की आखिर डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी कौन थे, तो चलीए दोस्तों आगे बढते है और डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी के बारे जानते है।

Dr. sarvepalli radhakrishnan

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी के बारे में दो चार लाइन || Dr sarvepalli radhakrishnan speech two lines in hindi:-

इस प्रकार काम करो कि हमारे जीवन में एक पहचान बन जाए,

हर कदम इस कदर चलो कि निशान बन जाए,

यहाँ सभी जान लेते हैं,

जीवन को इस प्रकार से जियो कि वह एक मिसाईल बने।

सुख-दुःख की धूप छांव से परे देख,

इन ख्वाबों के गाँव से परे देख,

क्या तूफान आपकी नाव को डुबो देगा?

तूफान की हवाओं के आगे देखो।

जीवन में दुख के बहोत से कारण होते हैं।

बिन वजह खुश रहना मजा ही अलग होता है।

जहाँ चरागाहों में रोशनी नहीं है,

हमें आशा है कि वहाँ भी लौ जलाते रहेगे।


डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन भाषण || Dr. Sarvepalli Radhakrishnan Speech in Hindi

मेरे प्रिय माननीय मुख्याध्यापक, आदरणीय शिक्षकगण और मेरे प्यारे प्रिय दोस्तों, आज महान शिक्षक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी का जन्मदिन है। 

मेरा अपने दोनों हाथों सभी को सलाम और दिल से प्रणाम उस महान व्यक्ति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी के लिए, जिनके जन्मदिन को हम 5 सितम्बर को प्रति वर्ष "शिक्षक दिवस" के रुप में मनाते हैं। उन्हीं के संदर्भ में कहना चाहूँगा की वो हमारे देश के पहले उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति भी रह चुके थे। उन्होंने अपने राजनीति करीयर में आने से पहले अपने जीवन के लगभग 40 साल अध्यापन और ज्ञान जुटाने में दिए थे। आज हर एक के लिए जानना बहुत ही जरुरी है कि डॉ. राधाकृष्णन के जन्म दिवस को एक शिक्षक दिवस के रुप में क्यों मनाते हैं ?

आप सभी जानते ही हैं कि डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन एक विख्यात, महान दार्शनिक शिक्षाविद और शिक्षक थे। एक बार उनके शिष्यों और दोस्तों ने उनका जन्म दिवस मनाने का निश्चय किया। इस विचार पर उनसे अनुमति लेने गए तो उन्होने जवाब दिया कि मेरा जन्म दिन अलग से मनाने की बजाए अगर "शिक्षक दिवस" के रुप में मनाया जाए तो मुझे कितना गर्व महसूस होगा। इस दिन के बाद से पूरे देश के हर कोने में 5 सितम्बर को "शिक्षक दिवस" के रुप में मनाया जाता है। देश में पहली बार "शिक्षक दिवस" 5 सितम्बर 1962 को मनाया गया था।

शिक्षा तथा सीखने में सबसे अच्छी बात तो यह है कि शिक्षा को कोई भी इसे आप से छीन नहीं सकता। धन और दौलत तो चोरी भी हो सकता है लेकिन आप की शिक्षा का पूरा श्रेय एक शिक्षक को ही जाता है। नन्हे मुन्हे और छोटे बच्चों पर तो शिक्षक का प्रभाव कुछ ज्यादा ही होता है। शिक्षक जो भी कहते है उस बात वो पत्थर की लकीर मान लेते हैं। मान लीजिए शिक्षक ने एक बार गलती से भी कह दिया कि 3 + 3 = 4 होते हैं और घर में तो माता पिता तथा अन्य सदस्य जितना मर्जी हो उतना कहें कि 3 + 3 = 6 होते हैं, लेकिन छोटे बच्चे इस बात को नहीं मानेंगे। इन्हीं बातो से आभास होता है कि एक शिक्षक की बातों का हमारे जीवन पर कितना असर होता है।

सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन एक अच्छे गुणों की खान थे, लेकिन उनके एक खास गुण से शायद ही आप अभी तक अनजान ही होंगे वो यह है उनकी हाजिर जवाबी आइए, आज के इस शुभ अवसर पर उनका एक किस्सा आप से साझा करता हूं। एक बार डॉ. राधाकृष्णन जी भारतीय दर्शन के संबंध में व्याख्यान देने के उद्देश्य से इंग्लैण्ड गए। वहां बड़ी संख्या की तादाद में लोग उनका भाषण सुनने दूर दूर से आए थे, उसी वक्त तभी ही एक अंग्रेज़ व्यक्ति ने उनसे एक सवाल पूछा कि क्या हिन्दू नाम का कोई समाज है? कोई संस्कृति है ? तुम कितने बिखरे हुए हो? तुम्हारा एक जैसा कोई रंग नहीं कोई गोरा तो कोई काला, कोई धोती पहनता है तो कोई लुंगी, कोई कुर्ता तो कोई कमीज़ देखो हम सभी अंग्रेज एक जैसे हैं एक ही रंग और एक जैसा पहनावा है। सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन सर्वपल्ली ने उस अंग्रेज को उसी समय तुरंत ही कहा कि घोड़े तो अलग-अलग रंग और रूप के होते हैं, पर गधे सारे के सारे एक जैसे ही होते हैं।


Dr. sarvepalli radhakrishnan in hindi speech || डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन भाषण हिंदी में

Dr sarvepalli radhakrishnan speech


लास्ट में, मैं आपसे अपनी मन की बात कहना चाहूँगा, कि शिक्षक दिवस पर मन थोड़ा बोत दुखी भी है। आज के समय में कुछ शिक्षक अपने ज्ञान की बोलियाँ लगाने लगे हैं। गुरु और शिष्य की परम्पराओ को कहीं न कहीं कलंकित किया जा रहा है। आए दिनों शिक्षको से विद्यार्थियों तथा विद्यार्थियों से शिक्षकों के साथ दुर्व्यवहार की खबरे ज्यादा सुनने को मिलती हैं। शिक्षा अपने मूल्यों और कर्तव्यों को नष्ट कर बाज़ार बनता नजर आ रहा है। शिक्षा और शिक्षण को लेकर बच्चों में तनाव दिन ब दिन बढ़ता ही जा रहा है, न जाने वे कई गलत रास्तों और नशे की लत को जाने अनजाने में अपना लेते हैं।

आइए हम सभी इस "शिक्षक दिवस" के इस शुभ अवसर पर हम सभी विद्यार्थीगण और शिक्षकगण एक दूसरे के साथ मिलकर यह शपथ लें कि हम गुरू और शिष्य की इस महान परम्पराऔ को बेहतर और सही ढंग से समझें और एक अच्छे भावी समाज के निर्माण में मिलकर सभी अपना सहयोग दें। शिक्षा को बाज़ारी बनने से रोकें तथा सरकार के साथ-साथ हम सब को भी मिलकर शिक्षा के क्षेत्र में एक नए भारत के निर्माण में अपना योगदान दें।

जिन्होंने हमें शिक्षा देकर जिन्दगी में जीना सिखा दिया है ऐसे गुरु को मैं प्रणाम करता हूं।

शिक्षक ज्ञान की छवि है, शिक्षक के बिना भला 

किसने विद्या पाया है।

अरे शिक्षक तो वह महान व्यक्ति है 

जिसने हमें जीवन जीना सिखाया है।

ऐसे महान शिक्षक को मेरा शत-शत नमन।

शिक्षक के ज्ञान का कोई नहीं लगा सकता मोल।

लाखों-करोड़ो से भी ज्यादा है 

शिक्षक की शिक्षा का अनमोल।

भारत माता की जय,

धन्यवाद,

जय हिन्द,

जय किसान,


प्रिय दोस्तों उम्मीद करता हूँ की आपको "डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन भाषण" Dr. sarvepalli radhakrishnan speech in hindi जानकारी पसंद आई होगी यदि आप को जानकारी अच्छी लगे तो अपने दोस्तों में ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।


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