छत्रपती शिवाजी महाराज भाषण 2022 - Chhatrapati shivaji maharaj Speech in hindi

छत्रपति शिवाजी महाराज भाषन: नमस्कार दोस्तों स्वागत आपका आज की इस जानकारी में दोस्तों आज हम मराठा का वीर पुत्र छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन पर आधारित भाषन करने वाले है। 

दोस्तों शिवाजी महाराज को मराठा के सबसे शक्तिशाली राजाओं मे से एक माना जाता है। जो देश के लिए कितने गौरवमय की बात है।

Chhatrapati shivaji maharaj bhashan

छत्रपति शिवाजी महाराज भाषन || Chhatrapati shivaji maharaj bhashan in hindi

मेरे प्रिय माननीय मुख्याध्यापक, आदरणीय शिक्षकगण और मेरे प्यारे प्रिय दोस्तों, आज मराठा साम्राज्य के महान संस्थापक छत्रपती शिवाजी महाराज इनका जन्मदिन है। 

छत्रपती शिवाजी महाराज का जन्म 19 फरवरी 1663  को पुणे जिले में शिवनेरी दुर्ग पर हुआ। उनके पिताजी का नाम शहाजी भोसले और माताजी का नाम जिजाबाई था।

शहाजी बीजापुर सुल्तान की सेना में अफसर थे। जिजाबाई अक्सर शिवाजी को रामायण और महाभारत की कहानियाँ सुनाया करती थी। 

शिवाजी महाराज का देश के प्रति अगाध प्रेम और उनका शक्तिशाली चरित्र इन्हीं कारण बना। उनकी माता गुणस्वभाव और व्यवहार में वीरांगना नारी थी। 

माताजी ने उन्हें तलवार चलाना, घोडसवारी आदि सिखाया था।

बचपन में ही शिवाजी अपनी आयु के बालकों को इकट्टे करके उनके नेता बनकर युद्ध करते और किले बनाते थे।

सोलह साल की छोटी सी उम्र में उन्होंने पुणे के तोरणदुर्ग पर हमला कर जीत हासिल की। उन्हें युद्ध का प्रशिक्षण और प्रशासन की समज दादोजी कोंडदेव से मिली थी। 

उन्होंने अफजलखान जैसे शक्तिशाली सरदार की हत्या बड़े चतुराई से की थी। शाइस्ता खाँ को उन्होंने ऐसा सबक सिखाया की वो मरते दम तक उसे नही भुला। 

वे एक कुशल योध्दा थे। उन्होंने अपने दम पर दुश्मनों के छक्के छुड़ा दिए ! इसलिए उनकी इसी साहसी वीरता के कारण से उन्हें एक आदर्श एवं महान राष्ट्रपुरुष कहा जाता है।

छत्रपति शिवाजी महाराज भाषन || Chhatrapati shivaji maharaj bhashan in hindi

छत्रपति शिवाजी महाराज भाषन

वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी, बहादुर, बुद्धिमानी शौर्यवीर, दयालू शासक थे। उनकी सेना में मुस्लिम नायक एवं सेनानी थे। वह किसी धर्म के खिलाफ नहीं थे। 

उन्हें कतई मंजूर नहीं था कि लोग जात पात की झगड़ो में उलझे ! वह महिलाओं के सम्मान के कट्टर समर्थक थे। उन्होंने सैनिकों को सख्त निर्देश दिए थे की छापा मारते वक्त किसी भी महिला को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए।

उनपर महाराष्ट्र के लोकप्रिय सेल रामदास एवं तुकाराम का भी प्रभाव था। उनका व्यक्तित्व आकर्षक इतना था कि उनसे मिलनेवाला हर व्यक्ति उनसे प्रभावित हो जाता था। 

छत्रपति शिवाजी महाराज का 3 अप्रैल 1680 ई में रायगड पर स्वर्गवास हुआ।

वे केवल मराठा राष्ट्र के निर्माता नही बल्कि मध्ययुग के सर्वश्रेष्ठ मौलिक प्रतिभासंपन्न व्यक्ति थे। महाराष्ट्र की विभिन्न जातीयों के संघर्ष समाप्त कर उनको एक सूत्र में बाँधने का श्रेय शिवाजी को है। 

वे हमेशा कहते थे, की जब होसले बुलंद हो, तो पहाड़ भी एक मिट्टी का ढेर लगती है।" ऐसा उनका हौसला बुलंद था। 

आज हमारे उनके विचारों की नितांत आवश्यकता है। हम सभी को गर्व होना चाहिए की ऐसा राष्ट्र निर्माता हमारे देश की मिट्टी में पैदा हुआ था। 

हमको आज से ऐसे व्यक्तित्व का निर्माण समाज में करना है। मुझे उम्मीद है कि आप सभी उनके समृद्ध विचारों को अंगीकृत करे, हमारे देश का नाम विश्व में ऊँचा करे।

हर जगह हर युग में पूजे जाते है वो लोग जो इन्सान नहीं वो तो साक्षात फरिश्ते होते हैं।

बसते है वो हर सच्चे के दिल में अमर युगों युगों तक उनके किस्से होते है।

जय हिंद | जय हो शिवाजी की |

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