Narmada Jayanti 2022 - नर्मदा जयंती क्यों और कब मनाई जाती है जाने सही तारीख और दिन


Narmada Jayanti Festival 2022: नर्मदा जयंती एक भारतीय त्योहार है जो अमरकंटक मे मां नर्मदा को याद करने के लिए मनाया जाता है. नर्मदा जयंती प्रति वर्ष  7 फरवरी को मनाई जाती है. जो माह की शुक्लपक्ष सप्तमी तिथि को पड़ता है. इस जयंती के सुअवसर पर लोग मां नर्मदा के तट पर एकत्रित होकर कई प्रकार के कार्यक्रम आयोजित करते है और माँ नर्मदा की आराधना कर उन्हें श्रद्धां अर्पित करते है.

नर्मदा जयंती को ज्यादातर हिन्दू परिजन मनाते है क्योंकि यह हिन्दूओ के लिए एक महत्वपूर्ण त्योहार के समान है. वैसे तो हिन्दूओ के लिए इस प्रकार के त्योहार बहुत से प्रचलित है लेकिन यह भी उन्ही में से एक है. युगों-युगों से यह जयंती मनाते आ रहे हैं, जिसमें मां नर्मदा के प्रति लोगों की आस्था और उनके प्रति श्रद्धा बनी हुई है. क्योंकि हिन्दू समाज के लिए यह त्योहार बहुत ही महत्वपूर्ण है.

गंगा की तरह ही नर्मदा नदी एक पवित्र नदी मानी जाती है जिसका इतिहास गवाह नर्मदा सिर्फ नदी नहीं बल्कि एक देवी का रूप है जिसके कारण उनके भक्तगण उन्हें नर्मदा जयंती पर पूजते हैं. यूँ कहें तो नर्मदा जयंती एक बड़े लेवल का त्योहार है क्योंकि आज के समय में उनके भक्त इतने है हम कभी कल्पना भी नहीं कर सकते है. नर्मदा जयंती खासकर मां नर्मदा के जन्मोत्सव मनाने के लिए मनाया जाता है.


नर्मदा जयंती जयंती के बारे में

नर्मदा जयंती नर्मदा नदी की देवी के जन्म दिन को लेकर मनाई जाती है. नर्मदा नदी को भारत की उन सभी प्रमुख नदियों में से एक मानते हैं. हिन्दू धर्म में इस देवी को प्राचीन समय से ही पूजते आ रहे हैं और आगे भी इसी तरह पूजते रहेंगे. नर्मदा नदी अमरकंटक से बहती हुई रत्नासागर में मिल जाती है. जिसके चलते यह रास्ते में कई जीवों का उद्धार भी करती है.


मां नर्मदा जयंती क्यों मनाते है

नर्मदा जयंती मनाने के पीछे बहुत सी पौराणिक कहानियाँ और कथाएँ प्रचलित है जिन आधारित हर साल 7 फरवरी को नर्मदा जयंती मनाई जाती है कहा जाता है कि नर्मदा नदी में स्नान करने से व्यक्ति के दुष्कर्म नष्ट हो जाते है और वह अपने पापों से मुक्त हो जाता है, ऐसी भी मान्यता है हम पूरे तन मन से अपनी इच्छा से नर्मदा देवी से जो भी मांगते वो इच्छाए हमारी पूरी होती है.


नर्मदा जयंती पर आधारित पौराणिकथा (कहानी)

वैसे तो नर्मदा जयंती मनाने के पीछे कई कारण हैं लेकिन हम नर्मदा जयंती मनाने के लिए सबसे ज्यादा प्रचलित कथा की तरफ चलते है. पौराणिक कथा और कहानियों के अनुसार कहा जाता है कि भगवान महादेव अंधकार नाम के एक राक्षस का वध कर मेकल नामक एक पहाड़ पर तपस्या कर रहे थे. जो स्थान अभी वर्तमान में अमरकंटक नाम से प्रसिद्ध है. 

उन समय धरती पर हो रहे अधर्म को रोकने के लिए देवताओं ने भगवान विष्णु से सहायता मांगी थी तब भगवान विष्णु ने महादेव को समाधान हेतु महत्वपूर्ण शक्तियाँ प्रदान की थी उसी समय महादेव के मस्तक से एक बूँद पृथ्वी पर जा गिरी, उस बूंद से एक कन्या का जन्म हुआ, महादेव ने उसे नर्मदा का नाम दिया और उसे वर्दान देकर कहा प्रलय तुम्हारा कुछ नहीं कर सकता.

उस दिन को याद करने के लिए हर साल 7 फरवरी को नर्मदा जयंती के रूप में मनाते हैं. नर्मदा मां की परिक्रमा करने से घर में मंगलमय होता है और जीवन शान्ती और खुशियों से भरा जाता है 


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