धनतेरस का इतिहास क्या है? History of Dhanteras in Hindi

History of dhanteras in hindi 2022: धनतेरस का इतिहास क्या है? नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका आज के ऐतिहासिक लेख में, दोस्तों आज आप इस लेख के माध्यम से धनतेरस का इतिहास जानने वाले है.

दोस्तों यदि आप धनतेरस क्यों मनाया जाता है? (Dhanteras festival history in hind) धनतेरस त्योहार का इतिहास जानना चाहते हैं तो इस लेख में शुरू से लेकर अंत बने रहे है.

क्योंकि हमने इस पृष्ठ पर धनतेरस का त्योहार कब और क्यों मनाया जाता है?, धनतेरस की पौराणिक कथा, कहानी, धनतेरस पर क्या क्या खरीदते और धनतेरस का संक्षिप्त इतिहास हिंदी में दिया हुआ है.


धनतेरस | Dhanteras

Dhanteras in Hindi: धनतेरस शब्द की उत्पत्ति धन और तेरस शब्द से हुई है, धनतेरस का मतलब धन में तेरह गुना वृद्धि होना है. धन का अर्थ पैसा, सोना, चाँदी आदि है और तेरस का अर्थ कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष का तेरहवां दिन होता है.

धनतेरस को धनत्रयोदशी (Dhantrayodashi), धन्वंतरि जयंती (DhanwantriJayanti), त्रयोदशी (Trayodashi), ध्यान तेरस, धन्य तेरस आदि नामों से जाना जाता है.


धनतेरस क्या है? | What is Dhanteras

धनतेरस मुख्य रूप से एक भारतीय त्योहार है जो पूरे भारतवर्ष में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है. हिन्दू धर्म में इस दिन नई चीजों की खरीददारी और उनकी पूजा करना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. लोगों का ऐसा दावा है कि इस दिन हर प्रकार की नई वस्तुएँ खरीदने से उनमें तेरह गुना वृद्धि होती है.

धनतेरस दिवाली सीजन का पहला त्योहार है. धनतेरस दीपावली के त्योहारों की श्रेणी में आता है पांच दिवसीय दिवाली उत्सव की शुरुआत धनतेरस से मानी जाती है. धनतेरस दिवाली के आगमन का प्रतीक है. धनतेरस के दूसरे दिन दिवाली का त्योहार मनाया जाता है जो कि एक बड़ा त्योहार है.

धनतेरस का त्योहार मुख्यतः हिन्दू धर्म के परिजनों द्वारा मनाया जाता है. हिन्दू धर्म में इस पर्व का विशेष महत्व है. यह त्योहार धन, संपत्ति, साधन आदि वस्तुओं से जुड़ा हुआ है. इस दिन सोना, चाँदी, बर्तन आदि महंगे सामान खरीदना शुभ माना जाता है. यह पर्व हमारे जीवन के लिए समृद्ध और ख़ुशी का त्योहार है.


धनतेरस का त्योहार कब और क्यों मनाया जाता है?

Dhanteras kab manaya jata hain: धनतेरस का त्योहार प्रति वर्ष "कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी" को संपूर्ण भारतवर्ष में मनाया जाता है. इस दिन विशेषकर कुबेर, धन्वंतरि, यमराज, लक्ष्मी, गणेशजी और विश्वकर्मा आदि देवी-देवताओं की पूजा अर्चना की जाती हैं. हर वर्ष की तरह ही इस वर्ष भी धनतेरस 23 अक्टूबर 2022 को बड़े हर्ष और उल्लास के साथ मनाई जाएगी.

Dhanteras kyun manaya jata hain: धनतेरस खासकर दीपावली के शुभारंभ की खुशी में और विधि विधान के साथ कीमती वस्तुओं की खरीददारी हेतु मनाया जाता है. इस दिन विभिन्न प्रकार के महंगे गहने, वाहन, बर्तन आदि खरीदे जाते है. धनतेरस मुख्यतः इसलिए मनाया जाता है क्योंकि यह दिवाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. धनतेरस मनाने के पीछे कई पौराणिक कथाएँ और कहानियाँ प्रचलित है.

जिनमें से "समुद्र मंथन की कथा" को विशेष महत्व दिया जाता है. कहा जाता है कि इस दिन भगवान धन्वंतरि और माता लक्ष्मी जी सोने से बना कलश लेकर प्रकट हुए थे जिसमें अमृत भरा हुआ था तभी से इस दिन को भगवान धन्वंतरि के नाम से धनतेरस नाम दिया गया. भारत सरकार द्वारा धनतेरस के पर्व को "राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस" के रूप में मनाने का फैसला लिया गया है.


धनतेरस का इतिहास | History of Dhanteras in Hindi

धनतेरस हमारी धार्मिक प्रथाओ से जुड़ा हुआ पर्व है. इसे धन्वन्तरि जयंती भी कहा जाता है. इस त्योहार को हमारे बाप-दादा सदियों से मनाते आ रहे है और आगे भी इसी तरह खुशी और उमंग के साथ मनाते रहेंगे. धनतेरस हिन्दू धर्म में मनाए जाने वाले सभी त्योहारों में से एक प्रमुख और महत्वपूर्ण त्योहार है

धनतेरस दीपावली के आने की सूचना देता है. दिवाली की विभिन्न वस्तुओं की खरीददारी धनतेरस से ही शुरू होती है. क्योंकि यह दीपावली से जुड़ा हुआ विशेष पर्व है जो दिवाली की शुरुआत को ओर भी अधिक खुशहाल बनाता है. द्रिकपंचांग के अनुसार इस दिन को "राष्ट्रीय आयुर्वेद जयंती" के रूप में मनाया जाता है

धनतेरस का इतिहास क्या है?: धनतेरस खासकर चिकित्सा पद्धति के जन्मदाता और आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरी की स्मृति के संदर्भ में मनाया जाता है. इस दिन लोग अपने घरों में नए बर्तन ख़रीदते हैं एवं उनमें ताजा पकवान बनाकर भगवान धन्वंतरि को अर्पित करते है.

धार्मिक और ऐतिहासिक दोनों दृष्टि से धनतेरस का विशेष महत्त्व है. धनतेरस का इतिहास भगवान धन्वंतरी और माता लक्ष्मी की पूजा से जुड़ा हुआ है. भगवान धन्वन्तरि का जन्म ईसा काल से लगभग 10,000 वर्ष पहले हुआ था. उनके पिता का नाम राजा धन्व था. राजा धन्व काशी के राजा थे.

भगवान धन्वंतरी शुरू से ही शल्य शास्त्र में निपुण थे. कहा जाता है कि धनतेरस के दिन कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को भगवान धन्वन्तरि का जन्म हुआ था तब वे अपने साथ अमृत से भरा हुआ कलश लेकर प्रकट हुए थे इसलिए इस दिन को धनतेरस नाम से जाना जाता है.


धनतेरस की पौराणिक कथा | Story of Dhanteras in Hindi

एक बार एक हिमा नाम का राजा था. जब उसका विवाह हुआ तब उसके विवाह के चौथे दिन ज्योतिषी ने उसे बताया था कि कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को आपकी निश्चित मृत्यु दस्तक दे रही है. यह भविष्यवाणी सुनकर राजा हिमा भावुक हो गए और उन्होंने घर जाकर अपनी पत्नी को यह बात बताई.

तब उनकी पत्नी ने सोने और चाँदी से बनें सभी कीमती जेवरों को अपने कक्ष में रख दिया और शाम को घर के चारों ओर तेल के दीए जलाए जिससे घर बहुत ही सजा हुआ और चमकदार दिखने लगा, जब रात में स्वयं यमराज राजा हिमा के प्राण हरण करने के लिए आए तो वे भी ये सब देख आश्चर्यचकित हो गए

जब यमराज राजा हिमा के प्राण हरण करने के लिए  दरवाजे के पास से गुजर रहे थे तब वे दीयों के प्रकाश और आभूषणों की तेज चमक के कारण अंधे हो गए, कक्ष के अंदर राजा हिमा की पत्नी उन्हें कहानियाँ सुना रही थी तब यमराज भी चुपचाप उनकी कहानियाँ सुनने लगे, जब सुबह हुई तो यमराज निराश ही वापस यमलोक लौटे. इस प्रकार राजा हिमा के प्राण बच गए


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