सती अनुसूया का इतिहास व जीवन परिचय - Sati Anusuya History & Biography

Sati Anusuya History & Biography in Hindi: नमस्कार दोस्तों कैसे स्वागत है आपका आज के इस ऐतिहासिक लेख में, दोस्तों यदि आप यहाँ सती माता अनुसूया के बारे में जानने के लिए आए हैं तो आप हमारे साथ अंत तक बनें रहिए क्योंकि आज हम यहाँ इस लेख में आपको Sati Anusuya History & Biography in Hindi सती माता अनुसूया का इतिहास व जीवन परिचय बता रहे है. जिसमें हम माता अनुसूया (अनुसुइया) का जीवन परिचय, इतिहास, कथा व उनके स्वर्णमयी योगदान, कार्यों आदि के बारे में जानेंगे.

सती अनुसूया का इतिहास व जीवन परिचय - Sati Anusuya History & Biography
Sati Anusuya History & Biography


सती अनुसूया का इतिहास व जीवन परिचय - Sati Anusuya History & Biography in Hindi

सती माता अनुसूया प्रजापति कर्दम और देवहूति की प्रमुख चौबीस कन्याओं में से एक थी. जो साक्षात स्वयं ब्रह्माजी के मानस पुत्र संत महर्षि अत्रि मुनि की पत्नी थी. उनका जन्म एक अत्यंत ही उच्च कुल में हुआ था. भारत में नारी धर्म के सती व साध्वी में आज उनका नाम सबसे अधिक प्रसिद्ध है. सती माता अनुसूया ने अपने पति महर्षि अत्रि मुनि की सतत सेवा व स्नेह से उनका हृदय जीत लिया.

जिससे प्रसन्न होकर महर्षि अत्रि मुनि ने माता अनुसूया को पतिव्रता धर्म ऐसे ही युगों युगों तक निभाने का आशीर्वाद प्रदान किया था. माता अनुसूया पतिव्रता धर्म निभाने वाली तीनों लोको में सर्वश्रेष्ठ नारी थी. उनके दरबार में आए हुए समस्त ऋषि, पशु-पक्षी व अन्य कोई भी प्राणी बिना भोजन किए नहीं जाते थे. उनकी पतिव्रता धर्म की तेज शक्ती इतनी अधिक थी कि आकाश में जाते हुए देवताओं को भी इसका एहसास होता था.

इसलिए उनके तेज व शक्ति के प्रभाव के कारण उन्हें "सती अनुसूया" कहा जाता है. उन्होंने तीनों लोको के परमात्माओं साक्षात ब्रह्मा, विष्णु और शिव तीनों की कठिन तपस्या की तथा उनके दिए हुए वर्दान से अपने तीन पुत्रों की प्राप्ति की थी. जब भगवान राम वनवास गए थे उस समय भगवान राम, माता सीता व लक्ष्मण का स्वागत कर सती माता अनुसूया ने अपने आश्रम में उन्हें आश्रय दिया था. 

इस दौरान भगवान श्री राम की प्रिय पत्नी माता सीता को अपने पतिव्रता धर्म की शिक्षा भी दी थी. सती माता अनुसूया को खासकर अपने "पतिव्रत धर्म" के लिए जाना जाता है. जिन्होंने अपने धर्म शक्ती से तीनों लोको के स्वामी ब्रह्मा, विष्णु और शिवजी को भी मन मुग्ध कर उनकी दी हुई कड़ी परीक्षा पास की थी. सती माता अनुसूया अपने पतिव्रत धर्म के लिए प्रसिद्ध है. जो पूरे जगत में सती-साध्वी नारियों में उच्च है.


सती माता अनुसूया जयंती 2022

अनुसूया जयंती प्रति सती माता अनुसूया को याद करने व उनके पतिव्रता धर्म की पालना करने के लिए मनाई जाती है. क्योंकि माँ अनुसूया के दर्शन पाकर सब लोग धन्य हो जाते हैं. इस त्योहार की पवित्रता हम सब के मन में समाहित हो जाती हैं. यह त्योहार खासकर भारत में मनाया जाता है. इसे मनाने से हमारे घर में सुख शांति की रहती है.

अनुसूया जयंती के इस अवसर इस दिन स्त्रियां मां सती अनसूया से पतिव्रता होने का आशिर्वाद पाने की कामनाएँ करती है. इस त्योहार का आयोजन हर साल किया जाता है व इसे समस्त भारतीयों द्वारा अनुसूया जयंती के रूप में मनाया जाता है. 2022 में यह जयंती (त्योहार) 20 अप्रैल को है जो हर साल की तरह ही इस साल भी बड़े ही धूमधाम से मनाया जायेगा.


सती अनुसूया (अनुसुइया) की ऐतिहासिक कहानी व कथा

समस्त जगत में देवी अनुसूया सर्वश्रेष्ठ पतिव्रता थी, यह जानकर तीनों लोको की देवियाँ श्री लक्ष्मी जी, श्री पार्वती और श्री सरस्वती जी ने सती अनुसूया के पतिव्रता धर्म की परीक्षा लेने के बारे में सोचा क्योंकि तीनों देवियों को अपने पतिव्रता पर बड़ा ही घमंड था. यह बात उनके पतिदेवो को पता चली जो भगवान ब्रह्मा, विष्णु और शिवजी थे. 

उन तीनों भगवानों ने यह तय किया की क्यूँ न हम देवी अनुसूया के पतिव्रता धर्म की परीक्षा लें. उन तीनों भगवानों ने अपना स्वरूप बदला और वे ऋषियों के रूप में देवी अनुसूया के पास अत्रि-आश्रम पहुँचे. देवी अनुसूया ने बड़े ही सत्कार व आदर के साथ उनका स्वागत किया. उन्होंने तुरंत ही देवी अनुसूया से कहा कि हम बहुत ही दूर से आए है 

हमारे लिए शीघ्र ही भोजन की व्यवस्था करों और हाँ याद रखना की आप हमें निर्वस्त्र होकर भोजन परोसोंगी तब ही हम भोजन ग्रहण करेंगे. यह सुनकर देवी अनुसूया बहार तपस्या कर रहे अपने पति अत्रि मुनि के पास गई उन्होंने देवी अनुसूया से आप कहा वे तीनों साक्षात परमात्मा है जो तुम्हारी परीक्षा लेने के लिए आए हुए है. 

तुम तो उनकी पुत्री के समान हो वो तीनों हमारे समस्त जगत के माता-पिता है. इसलिए माता पिता के सामने निर्वस्त्र होना किस बात की लज्जा है. जाओं तुम उनके उद्देश्य का पालन करों. जाते-जाते देवी अनुसूया बड़े संकट में पड़ने की वजह से यह सोचने लगती हैं "अगर मैंने पतिव्रता धर्म का सही पालन किया है और

अपने पूरे तन, मन, वचन व कर्म से कर रही हूँ तो ये आए हुए तीनों ऋषि, मेरे नवजात शिशु हो जाँय. यह सोच कर शीघ्र ही देवी अनुसूया ऋषियों के बताए हुए, नियमों का पालन करते हुए निर्वस्त्र होकर भोजन परोसने लगी. यह देखकर तीनों ऋषि नवजात शिशु हो गए और वो देवी अनुसूया की गोद में खेलने लगे.


Sati Anusuya History & Biography FAQ in Hindi

Q.1 सती अनुसूया कौन थी?

Ans. देवी अनुसूया पतिव्रता धर्म की कड़ी पक्षधर व अत्रि मुनि की पत्नी थी.

Q.2 सती देवी अनुसूया के पति कौन थे?

Ans. ऋषि अत्रि मुनि.

Q.3 सती अनसूया का जन्म कब और कहां हुआ था?

Ans. सती अनुसूया का जन्म एक अत्यंत ही उच्च कुल में हुआ था.

Q.4 सती माता अनुसूया जयंती कब और क्यों मनाई जाती है?

Ans. अनुसूया जयंती, माता अनुसूया के पतिव्रता धर्म को याद करने के लिए मनाई जाती है. 2022 में यह 20 अप्रैल को है.


मै उम्मीद और आशा करता हूँ कि आपको सती अनुसूया का इतिहास व जीवन परिचय Sati Anusuya History & Biography in Hindi का लेखन पसंद आया होगा यदि आपको यह लेख पसंद आये तो अपने मित्रों में जरूर शेयर करें.


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