क्रिसमस डे का इतिहास - Christmas Day Festival history in hindi

नमस्कार! मित्रों जैसा कि आप जानते ही हैं कि Christmas Day एक बोहत ही प्रसिद्ध त्योहार है जो लगभग पूरे विश्व में मनाया जाता है. यह खास तौर पर ईसा मसीह (यीशु) के जन्म दिन को लेकर उनके अनुयायी द्वारा मनाया जाता है. यदि आप क्रिसमस डे के बारे जानने चाहते हैं तो अंत तक बने रहीय आज की इस ऐतिहासिक जानकारी में क्योंकि आज हम यहाँ आपके लिए इस पृष्ठ पर "क्रिसमस डे त्योहार का इतिहास" लेकर हाजिर हुए है तो चलीए शुरू करते है और जानते Christmas Day Festival की history हिन्दी में.

ये भी पढ़े: - Happy New Year Speech in Hindi 2022 - नए साल पर भाषण


क्रिसमस डे का इतिहास Christmas Day history in hindi


Christmas Day history: क्रिसमस डे प्रति वर्ष 25 दिसंबर को मनाया जाता है. यह ईसाई धर्म का एक सबसे महत्वपूर्ण त्योहार है. इसलिए यह  Festival ज्यादातर ईसाई अनुयायी मनाते है. लेकिन सांस्कृतिक रूप से गैर ईसाई भी इस त्योहार को मनाते है. क्रिसमस डे को बड़ा दिन भी कहते है. इस दिन को सम्पूर्ण विश्व में अवकाश होता है.

आज के समय में क्रिसमस इतना famous हो गया है आप इसके बारे में सोच भी नहीं सकते है. हर देश में ज्यादातर क्रिसमस त्योहार का ही तहलका मचा हुआ रहता है. यह विश्व का सबसे बड़ा वार्षिक उत्सव हैं. यूँ कहें तो क्रिसमस प्रेम और शान्ती का प्रतीक है जो हर व्यक्ति के जीवन में खुशियाँ ही खुशियाँ भर देता है. 

कहा जाता है कि इस दिन ईसा मसीह यानी कि यीशु पिता, साक्षात परमेश्वर का जन्म हुआ था. इसलिए उनके जन्मोत्सव को मनाने के लिए क्रिसमस डे त्योहार मनाया जाता है. इसी को लेकर कई सारी कहानियाँ और कथाएँ भी प्रचलित है. जिन पर क्रिसमस का पूर्ण रूप से मूल्यांकन किया गया है. हालाँकि यह अभी तक सही से साबित नहीं हो पाया है कि इसी दिन ईसा मसीह का जन्म हुआ था.

यह पढ़कर आपके मन यह सवाल जरूर आ रहा होगा कि क्रिसमस ईसा मसीह के जन्म दिन पर मनाया जाता है तो फिर उसमे क्रिसमस ट्री और सांता क्लॉस को क्यूँ जोड़ा जाता है इनका क्रिसमस में क्या महत्व होता है. इस बात पर आप ज्यादा मत सोचिए क्योंकि इस पर हम डिटेल में जानने वाले हैं कि क्रिसमस डे पर क्रिसमस ट्री और सांता क्लॉस को एक साथ शामिल क्यूँ किया जाता है और इसका मुख्य राज क्या है?


क्रिसमस का इतिहास Christmas history in Hindi

क्रिसमस का इतिहास कई शताब्दियों पुराना है यह बाकी त्योहारों की तुलना में एक ऐसा त्योहार है जो सदियों से मनाते आ रहे है और मनाते रहेंगे. क्रिसमस सर्वप्रथम रोम देश में मनाया गया था उससे पहले रोम में 25 दिसंबर को सूर्यदेव का जन्म दिन मनाया जाता था. इसके साथ ही उस समय वहां इस दिन को कई देवी देवताओं की पूजा भी की जाती थी तब वहां के सम्राट सूर्य देवता की आराधना करते थे और वे उनको अपना मुख्य देवता मनाते थे. 

उसके बाद 330 ई को रोम में ईसाई धर्म का प्रचार तेजी से बढ़ने लगा और ईसाई धर्म के अनुयायी भी बहुत भारी मात्रा में हो गए तब 336 ई में कुछ ईसाई लोग ईसा मसीह को ही सूर्यदेव का अवतार मानने लगे थे और 25 दिसंबर को वे ईसा मसीह के जन्म को मनाने लगे थे उस समय से ही 25 दिसंबर को प्रतिवर्ष क्रिसमस डे मनाया जाता है.

क्रिसमस एक ऐसा त्योहार भी है जो साल के अंत में खुशियाँ लेकर आता है यह पल 25 दिसंबर से लगाकर 6 जनवरी तक कायम रहता है. ज्यादातर देशों में क्रिसमस को 24 दिसंबर को मनाया जाता है जिसमें जर्मनी, ब्रिटेन आदि देश शामिल है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार क्रिसमस 7 जनवरी को मनाया जाता है 

कालांतर में आए ईसा मसीह जब बारह वर्ष के थे तब ही उन्होंने अपनी धर्मचर्या की रूपरेखा से श्रोताओं को अपनी और आकर्षित कर लिया था. 30 वर्ष की आयु में उन्होंने अपने भाई से अमृत ग्रहण किया था वहां शासक द्वारा उनके भाई की मृत्यु के पश्चात वे खुद अमृत देने लगे थे. ईसा मसीह के बढ़ते हुए श्रंगार को देखकर यहूदी शासक भी उनसे जलने लगे थे. जिस कारण उन्होंने ईसा मसीह पर कई अत्याचार किए,उन अपराध का थोप जमाया, उन्हें कोड़े मारे और उन्हें सूली पर भी चढ़ाया गया.


क्रिसमस डे त्योहार का इतिहास History of Christmas Day Festival history in hindi

Christmas Day दिन ब दिन बहुत ही लोकप्रिय साबित हो रहा ऐसे में ईसाई परिजनों के लिए यह कितना महत्वपूर्ण है यह तो आप जानते ही हैं इसलिए Christmas Day का इतिहास जानना भी हमारे लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है. Christmas Day पहली बार 336 ई में रोम में मनाया गया था. जहाँ यीशु पिता जन्मे थे वहां.

क्रिसमस डे मनाने की परंपरा यीशु के जन्म के सैकड़ों साल बाद शुरू हुई थी. यीशु की जन्म तिथि अज्ञात है लेकिन फिर उनके जन्म दिन को यादगार बनाने के लिए क्रिसमस डे मनाया जाता है. क्रिसमस डे की तैयारी क्रिसमस आने से 10 दिन पूर्व ही शुरू हो जाती है और इस दिन सब लोग अपने-अपने घरों को साफ-सफाई कर और सजाकर चमकाते है.

क्रिसमस डे की शुरुआत हमेशा नई चीजों के माध्यम से की जाती है. इस दिन सब लोग नए उपहार को एक दूसरे के साथ आदान प्रदान करते है, मिठाइयाँ हल्वे आदि कई पकवान बनाते है, इस दिन क्रिसमस ट्री को बहुत महत्व दिया जाता है. चर्च में कई समारोह आयोजित किए जाते हैं चारों ओर खुशी का माहौल होता इस तरह हर साल बड़े ही धूम धाम से क्रिसमस डे को मनाया जाता है.


क्रिसमस ट्री का इतिहास Christmas tree history in hindi

जैसा कि हमने पहले जाना है कि क्रिसमस डे पर क्रिसमस ट्री का काफी ज्यादा महत्व होता है लेकिन यह जानना भी हमारे लिए बेहद ही जरूरी है कि क्या क्रिसमस डे क्रिसमस ट्री के बिना अधूरा है? क्या हम इसे क्रिसमस ट्री के बिना मना सकते हैं? क्रिसमस ट्री का महत्व क्या है? क्रिसमस डे पर क्रिसमस ट्री क्यों आवश्यक है?

क्रिसमस डे पर क्रिसमस ट्री खरीदना तो बस रिवाज है. इसकी शुरुआत उत्तरी यूरोप से सैकड़ों सालों पूर्व हुई थी. उसके बाद इसे 16वीं सदि के आसपास जर्मनी में प्रदर्शित किया गया था. जिसमें Fir पौधे को सजाकर क्रिसमस मनाया गया था. तभी से क्रिसमस को ट्री के साथ मनाया जाता है. इसके अलावा कुछ लोग तो चेरी के पौधे को भी इस काम में प्रयोग करते है. 

क्रिसमस डे क्रिसमस ट्री के बिना अधूरा नहीं आप चाहें तो बिना ट्री के भी इस त्योहार को मना सकते हैं क्रिसमस ट्री तो क्रिसमस डे को स्पेशल बनाने के लिए एक सदियों पुराना रिवाज है. जो लोग क्रिसमस ट्री को नहीं खरीद सकते है वे इसके बजाय लकड़ी के पिरामिड का शेप बनाकर देते है और क्रिसमस को मनाते है.

कहा जाता है कि क्रिसमस ट्री का पेड़ सदाबहार होता है जिसकी पत्तियाँ कभी मुरझाती नहीं है. क्रिसमस डे के दिन लोग इस ट्री को काटकर अपने घर लाते हैं और इसे रिबन, कैंडी, चाॅकलेट, रंग बिरंगी लाइट्स आदि से सजाकर बहुत ही सुंदर बनाते है. इस तरह क्रिसमस में क्रिसमस ट्री का महत्व होता है.


सांता क्लॉज़ के बारे में इतिहास history of Santa Claus in hindi

क्रिसमस ट्री को तो जान लिया अब क्रिसमस में रही बात सांता क्लॉस की, की सांता क्लॉस कौन है?, सांता क्लॉस का क्रिसमस के साथ क्या कनेक्शन है?, सांता क्लॉस कहां रहते हैं?, सांता क्लॉस कैसे बनाते हैं? सांता क्लॉस का इतिहास क्या है? सांता क्लॉस को क्रिसमस के साथ क्यूँ जोड़ा जाता है? आदि इन सभी सवालों के बारे में जानते है.

सांता क्लॉस एक अमेरिका में रहने वाले साधु थे जो हर रोज बच्चों के लिए रात में गिफ्ट, चाॅकलेट आदि लेकर आते थे. उनका असली नाम निकोलस था उनका जन्म ईसा मसीह की मृत्यु के बाद हुआ था. सांता क्लॉस को मसीह के पिता भी कहा जाता है. लेकिन स्वाभाविक रूप से सांता क्लॉस और यीशु दोनों अलग-अलग मूल के थे.

सांता क्लॉस को क्रिसमस के साथ खासकर इसलिए जोड़ा जाता है क्योंकि सांता क्लॉस ईसाई धर्म के अनुयायी थे और वह इस धर्म के पादरी भी बने थे. बाकी इनका यीशु के साथ कोई संबंध नहीं था और हमें बाइबिल में भी इसका कोई उल्लेख देखने को नहीं मिलता है.

सांता क्लॉस बचपन से ही जरूरतमंद व्यक्तियों की मदद करना चाहते थे. इसलिए वे रोज बच्चों को कुछ न कुछ गिफ्ट दिया करते थे वे यह काम रात में किया करते थे क्योंकि वे दुनिया के शामने अपने पहचान चुपाना चाहते जिसकी वजह से वे चुपके उपहार देते थे. सांता क्लॉस बच्चों से बेहद ज्यादा प्रेम करते थे.

इस तरह सांता क्लॉस और क्रिसमस के बीच गहरा संबंध बनता गया. यही कारण है कि सांता क्लॉस का हर एक के प्रति इतना प्यार आज भी बना हुआ है और हर क्रिसमस डे पर उन्हें याद किया जाता है. बच्चे उन्हें सांता अंकल कहकर पुकारते हैं. 


क्रिसमस की ऐतिहासिक प्रचलित कथा (कहानी)

ईसा मसीह का जन्म पहली सदी के कलिस्य युग में नजरेन नामक स्थान की रहने वाली माता मरियम की कोख से हुआ था. ईसा मसीह के पिता साक्षात परमात्मा ही थे. माता मरियम जब गर्भवती थी तब वह एक कुंवारी कन्या ही थी. उस समय मरियम की सगाई दाऊद के राजवंशी यूसुफ़ से की गईं थी. 

एक दिन मरियम के पास स्वयं परमात्मा ने ही स्वर्गदूतो को भेजा था और उनके द्वारा मरियम को कहलवाया था कि आपकी कोख से एक संतान उत्पन्न होगी वह स्वयं परमात्मा ही आपकी कोख में विराजमान हुए है. उनका नाम आपको जीसस (Jesus) रखना है यह सुनकर मरियम ने कहा की मैं अभी कुँवारी हूँ, ऐसे में मैं एक मां बनूँगी यह कैसे संभव हो सकता है. तब स्वर्गलोक दूतो ने कहा की यह सब परमात्मा की मर्जी से हो रहा है आप मानो तो यह एक चमत्कार ही है. इतना कहकर स्वर्गदूत वहाँ से चले गए

उसके बाद इसी के चलते जल्द ही मरियम और यूसुफ़ ने विवाह कर लिया था. यूसुफ़ को विवाह से पहले ही यह ज्ञात था कि मरियम गर्भवती है और उनकी कोख में परमात्मा का अंश है. उनके राज्य में जब वहां के राजा ने कर वसूलने की घोषणा की थी तब उनके पास इतना धन नहीं था की वे राजा को कर के रूप में दे सकें तब उन्होंने वह स्थान छोड़कर बेथहलम जाना सही समझा.

बेथहलम जाने के लिए मरियम और यूसुफ़ को रास्ते में काफी सारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था. इस बीच उन्होंने कई दिनों तक यात्रा की थी उसके बाद वे बड़ी मुश्किल से बेथहलम पहुँचे थे उन्हें वहां पहुँचते-पहुँचते तब तक शाम हो गई थी ऐसे में उन्हें विश्राम की भी आवश्यकता थी. तब यूसुफ़ वहां विश्राम घर ढूंढ रहे थे तभी उन्हें वहां एक विश्राम घर रक्षक मिला यूसुफ़ ने उनसे कहा कि मेरी पत्नी गर्भवती है उसका शिशु प्रसव नजदीक है

तब रक्षक ने पास के पहाड़ी इलाकों की गुफाओं के बारे में बताया जहाँ गडरिये निवास करते थे. उसी के बताएँ हुए रास्ते से मरियम और यूसुफ़ एक गुफा तक पहुंचे और वे दोनों उस गुफा को साफ करके उसमें एक ही दिन रहे थे. उसकी अगली सुबह मरियम ने वही पर उस गुफा में शिशु को जन्म दे दिया. जिसका नाम उन्होंने स्वर्गदूतो के बताएँ गए तथ्यों अनुसार जीसस रखा था.


Christmas Day Festival history FAQ in hindi

Q.1 क्रिसमस क्यों मनाया जाता है?

Ans. क्रिसमस यीशु के जन्म दिवस को याद करने के लिए प्रति वर्ष 25 दिसंबर को मनाया जाता है.

Q.2 क्रिसमस डे का मतलब क्या होता है?

Ans. क्रिसमस डे का मतलब 'क्राइस्टस् मास' होता है और इसी मास में उस समय ईसा मसीह का जन्म हुआ था.

Q.3 25 दिसंबर को बड़ा दिन क्यों कहा जाता हैं?

Ans. क्रिसमस को हिंदी में संबोधित करने के लिए 25 दिसंबर को बड़ा दिन कहा जाता हैं.

Q.4 ईसाई धर्म का प्रमुख त्यौहार कौन सा है?

Ans. ईसाइयों का प्रमुख त्योहार क्रिसमस यानी कि क्रिसमस डे होता है.

Q.5 गर्मियों में क्रिसमस का पर्व कहां मनाया जाता है?

Ans. ऑस्ट्रेलिया में क्रिसमस त्योहार गर्मियों में मनाया जाता है.

Q.6 25 दिसंबर को कौनसा दिवस मनाया जाता है?

Ans. 25 दिसंबर को ईसा मसीह का जन्म दिवस मनाया जाता है.

Q.7 ऑस्ट्रेलिया में क्रिसमस पर्व किस ऋतु में मनाया जाता है?

Ans. ऑस्ट्रेलिया में क्रिसमस पर्व शीत ऋतु में मनाया जाता है.

Q.8 क्रिसमस डे सर्वप्रथम कहाँ मनाया गया था?

Ans. रोम में.

Q 8 क्रिसमस डे कैसे मनाते हैं?

Ans. क्रिसमस ट्री को सजाकर, उपहारों का आदान-प्रदान कर क्रिसमस को मनाया जाता है.


तो मित्रों यह था क्रिसमस डे का इतिहास Christmas Day Festival history in hindi का लेख. मित्रों आपको ये लेख कैसा लगा हमें कमेंट में जरूर से बताएँ और हां इस लेख को अपने मित्रों में शेयर करना न भूलें. हमारी साइट dramatalk.in पर विजिट करने के लिए आपका धन्यवाद.


Read More:

1. Essay on Albert Einstein in Hindi - अल्बर्ट आइंस्टीन पर निबन्ध

2. Essay on Sunita Williams in hindi - सुनीता विलियम्स पर निबंध हिन्दी

3. महात्मा गांधी पर बहुत छोटा भाषण Very short speech on Mahatma Gandhi in hindi


Dramatalk

Hello! I am the founder of this blog and a professional blogger. Here I regularly share helpful and useful information for my readers.

एक टिप्पणी भेजें (0)
और नया पुराने