माता कर्मा बाई जयंती || Karma Bai Jayanti

नमस्कार मेरे प्रिय मित्रों कर्मा बाई कौन थी? आज हम श्री कृष्ण की परम भक्त, जो श्री भगवान कृष्ण को अपने सामने बैठा कर खिचड़ी खिलाती थी और वर्तमान में राजस्थान के नागोर जिले की माता मां कर्मा बाई के नाम से प्रसिद्ध है। आज कर्मा बाई जयंती एव इनसे जुड़े हुए कुछ महत्वपूर्ण तथ्य का के बारे में जानने वाले है।

Karma Bai Jayanti
माता कर्मा बाई


माता कर्मा बाई परिचय:

माता कर्मा बाई का जन्म नागौर जिले के कालवा गांव में 20 जनवरी 1615 ई में हुआ था। मां कर्मा बाई के पिता का नाम जीवणराम डूडी और माता रतनी देवी था। कर्मा बाई बचपन से ही चमत्कारी थी। कर्मा तैली समाज से थी।


भक्त माता कर्मा बाई जयंती:

मां कर्मा बाई जयंती प्रत्येक वर्ष 20 मार्च को मनाई जाती है। इस जयंती की सुरुआती 'साहू समाज' के द्वारा की गई। जिन्हें तैली समाज के नाम से भी जाना जाता है। ये लोग कर्मा बाई की जयंती मनाने की तैयारियाँ ठीक दो दिन पहले ही शुरू कर देते है। 

मां कर्मा बाई जयंती के अवसर पर यहाँ के रहने वाले सभी तैली और अन्य लोग मंदिर में एक साथ इकठ्ठे हो जाते है और सबसे पहले भजन-कीर्तन पूजा-अर्चना और धार्मिक-अनुष्ठान आदि करते है। बाद में माता कर्मा पर भाषण, कथा, कविता, राई, दोहे आदि अन्य कार्यक्रम करते है। 

लगभग सुबह 10 बजे सभी लोग एक शुभारंभ यात्रा करते है। यात्रिगण महिलाएँ अपने सिर पर कलश रखकर यात्रा प्रारंभ करती है। उसके बाद दोपहर के समय सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन करते है। इसी प्रकार देश भर से तैली समाज के लोग कर्मा बाई के मंदिर आते है और बड़े ही खुशी कर्मा त्योहार है को मनाते है।


कर्मा बाई जयंती कब और कहाँ मनाया जाता है:

मां कर्मा बाई जयंती मार्च के महीने में राजस्थान के नागौर जिले के कालवा नामक स्थान पर मनाई जाती है। कर्मा बाई मंदिर भी यही मौजूद है, जो कालवा गांव के भक्त और ग्राम वासियो द्वारा बनाया गया है। माता कर्मा का एक मंदिर उत्तर प्रदेश के विजयपुरा में भी स्थिति है जो "भक्त शिरोमणि कर्मा बाई मंदिर गौरव" के नाम से प्रसिद्ध है।


कर्मा बाई जयंती की पूजा:

माता कर्मा जयंती के दिन मां की पूजा-अर्चना का सबसे सही स्थान अपना घर या कर्मा माता के मंदिर में करते है। पूजा में ताजे और खुश्बूदार फूल, चावल, कुमकुम, हल्दी, दीया आदि का प्रयोग करें। पूजन करने के ठीक बाद मां के सिद्ध मंत्र का एक सौ आठ बार जाप करे। इस पूजन से व्यक्ति की अनेक मनोकामनाएँ पूर्ण होती है।


कर्मा बाई के चमत्कार:

कर्मा बाई वास्तव में बचपन में ही बहुत चमत्कारी साबित हुई क्योंकि जब कर्मा बाई का जन्म तब ही वह हसी और बाद में कालवा गांव में बहुत ही तेज आंधी, तुफान और बारिश हुई।

इस प्रकार माता कर्मा बाई जयंती के दिन कर्मा और श्री कृष्ण भगवान के भक्त, श्रद्धालु, आदि कई लोग बड़े ही धूमधाम से कर्मा जयंती को खुशी और उमंग के साथ मनाते है।


कर्मा बाई जयंती स्पेशल | Karma Bai Jayanti


मां कर्मा जयंती


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